क्या कोई समझ पाता ?
क्या कोई समझ पाता ? बात करनी थी। पर क्या कोई समझ पाता ? गलती हो गई मुझसे। पर क्या कोई उस गलती को सुधार पाता ? वक्त तो था मेरा। पर क्या कोई उस वक्त को ला पाता ? शायद ही कोई समझ पाता। पर क्या कोई समझना चाहता ? ये सवाल तो मेरा था। पर इस सवाल का कोई जवाब दे पाता ? वो गुज़रा हुआ पल ही तो था। पर क्या हर कोई उसे रोक पाता ? सपनो का आसमान ही तो था। पर क्या हर कोई उसे छू पाता ? ज़िंदगी की एक उम्मीद ही तो थी। पर क्या हर कोई उसे जिंदा रख पाता ? सुनेरा बचपन ही तो था। पर क्या हर कोई उसे संजो के रख पाता ? ...