सीखो……...
“सीखो……...
की मुस्कुराना सीखो।
की मुस्कुराना सीखो।
दूसरों के लिए नहीं ,अपने लिए।
मुस्कुराना सीखो दुनिया के लिए नहीं, अपने आप के लिए ।
की मोहब्बत करना सीखो।
इंसान
से नहीं, बकायदा किताबों से करना सीखो ।
किसी
चीज़ की उम्मीद न रखते
हुए भी।
सबको
साथ रखना सीखो।
वो जो तुमारा है, उसे अपना कहना सीखो।
ये जिंदगी छोटी सी है।
इस जिंदगी को जीना
सीखो।
कि तारों को देखो,
टिमटिमाना सीखो ।
अपनी
खुद की रौशनी से ,चारों
ओर उजाला करना सीखो।
अंधेरी रात का तुम चन्द्रमा बनना सीखो।
रात
की शीतल हवा को देखो।
खुद
अशांत रह कर भी ,
अपने
मन को शांत रखना सीखो
।
अगर
गलती तुम्हारी हो तो झुक जाना सीखो
।
पर बात अगर खुद पे आ जाये ना?
तो,अड़ जाना सीखो।
कोई
नहीं समझता तुम्हारी बात को ऐसे
ही।
तुम्हारी बात
को तुम समझाना सीखो।
कसके
गले लगाना सीखो।
अपने
सपनों को,
और आपने दागों को भी ।
अपनी
गलतियों को भी और अपने, कमियों को भी।
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