तुम काफी हो खुद के लिए.

                                      

                                                      

                                             तुम काफी हो खुद के लिए.


साथ निभाना है तो खुद का निभाना।

उसका साथ देना ही क्यों?

जो तुम्हारे साथ के काबिल ही ना हो।

 

कोई जरूरत नहीं है किसी को भी तुम्हारी।

तो कोई क्यों तुम्हारी जरूरत बने?

तुम खुद के लिए काफी हो।

 

आज वादा करो खुद से , कि।

की चाहे कुछ भी हो जाए |

हमेशा साथ निभाओगे।

दूसरों का ही नहीं, खुद का भी।

 

जो लोक कहते हैं  की  |

तुम्हारा तो साया भी साथ छोड़ देता है।

अंधेरे में,  तो हाँ।

 

क्योंकि उस वक्त मैं खुद हूँ, बहू नजर आती हूँ।

ना की मेरी परछाई।

 

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