कुछ बातें….
कुछ बातें….
किस बात
को बयां
करूं,
आँखों के
आँसू , या
चेहरे की
मुस्कान ॥
खुशी का
लम्हा , या
दुख के
पल ॥
जीने की
ख्वाहिश , या
रोज़ मरने
का ग़म
॥
उम्मीद की
छोटी सी
किरण ;
या निराशा
का घोर
अंधेरा ॥
खुद को
खाने वाली
चुप्पी,
या तसल्ली
देने वाली
झूठी बातें
॥
रात को
दिखने वाले
सपने;
या उन
सपनों का
टूटना ॥
दिल को
छूने वाले
अल्फ़ाज़,
या घायल
करने वाले
शब्द ॥
उन शब्दों की मिठास, या
उनका चुभना ॥
दिखने वाले
घाव , या
उनकी गहराई
॥
बताने वाली
तकलीफ , या
महसूस होने
वाली ॥
खुद को
पहचानने की
कोशिश,
या ना
पहचान पाने
का अफ़सोस
॥
किसी को
नजर ना
आये तुम,
या
नज़रअंदाज़ किये
गये हो
तुम ॥
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